Aprameyaḥ~Vishnu Saharshnama Hindi And English Meaning
अप्रमेयो हृषीकेशः पद्मनाभोऽमरप्रभुः । विश्वकर्मा मनुस्त्वष्टा स्थविष्ठः स्थविरो ध्रुवः ॥ 46~अप्रमेयः जिसकी किसी भी शब्द से व्याख्या नहीं की जा सकती, वही अप्रमेयः है। वह अव्यक्त है,इंद्रियों और बुद्धि की सीमाओं से परे है। उसे किसी प्रमाण, तर्क या भाषा में बाँधा नहीं जा सकता। जब मन के सभी द्वंद्व, कल्पनाएँ और विभाजन शांत हो जाते हैं, तभी मनुष्य उसकी उपस्थिति का आभास कर पाता है। वह किसी विशेष क्षण में प्रकट नहीं होता, क्योंकि वह तो सदा से विद्यमान है~हर पल, हर क्षण। उस विराट समष्टि के साथ एकाकार होने पर ही उसका वास्तविक ज्ञान संभव है। तब जानने वाला और जिसे जाना जा रहा है, दोनों का भेद मिट जाता है; केवल वही शाश्वत सत्य शेष रह जाता है। Aprameyo Hṛṣīkeśaḥ Padmanābho'maraprabhuḥ | Viśvakarmā Manustvaṣṭā Sthaviṣṭhaḥ Sthaviro Dhruvaḥ || 46~Aprameyaḥ Aprameyaḥ is That which cannot be described by any word. It is the Unmanifest, beyond the reach of the senses, the intellect, and all measures of knowledge. No language, concept, or proof can truly define It. Only when every conflict, div...