[Purusha]-Vishnu Sahasranama Hindi And English Meaning
पूतात्मा परमात्मा च मुक्तानां परमा गतिः ।अव्ययः पुरुषः साक्षी क्षेत्रज्ञोऽक्षर एव च ॥ २॥श्लोक 14."पुरुषः" जो वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी और आकाश से परे है; जो पाँच ज्ञानेंद्रियों, पाँच कर्मेंद्रियों तथा मन, बुद्धि, अहंकार और चित्त से अतीत है—वही इस समस्त सृष्टि का महान विराट पुरुष श्री विष्णु है। जिसकी दिव्य शक्ति से समस्त जीवन संरक्षित है और जिसकी अनंत ऊर्जा से यह सम्पूर्ण जगत प्रत्येक क्षण संचालित होता है, उस परम पुरुष को मेरा प्रणाम। जिसे न भय स्पर्श करता है,न शोक, न पीड़ा, न मोह और न ही ग्लानि; उस नित्य, शुद्ध और अविनाशी दिव्य उपस्थिति को मेरा प्रणाम। जो सूक्ष्म से भी सूक्ष्म होकर समस्त ब्रह्मांड की आत्मा है, वही एकमात्र परम सत्य, वास्तविक आत्मा और सनातन पुरुष है। हे नारायण! तुम ही वह परम पुरुष हो। तुम्हें बारंबार प्रणाम। The Great Purusha ~~14.Purusha He who transcends air, fire, water, earth, and space; who is beyond the five senses of knowledge, the five organs of action, and the inner instruments of mind, intellect, ego, and memory-He alone is the Supreme Cosmic Be...